सीतामढ़ी – शादी धूमधाम से हुई, बैंड-बाजे बजे, दूल्हे ने शाही अंदाज़ में एंट्री मारी, और दुल्हन के परिवार की सारी जिम्मेदारियाँ भी खुद उठा लीं। लेकिन फिल्मी कहानियों से भी ज्यादा ट्विस्ट और टर्न वाली इस शादी का अंत ऐसा होगा, ये शायद खुद दूल्हा अमित कुमार ने भी नहीं सोचा था।
शादी के बाद अमित अपनी नई-नवेली पत्नी संग हनीमून के लिए निकलने ही वाले थे। स्टेशन पर ट्रेन का इंतज़ार चल रहा था, दोनों प्लेटफॉर्म पर पहुंचे, अमित ने टिकट चेक किया, और जैसे ही वह अपनी सीट पर बैठने को हुए, उन्होंने पीछे मुड़कर देखा—“अरे, दुल्हन कहां गई?”
भागते-दौड़ते स्टेशन पर खोजबीन शुरू हुई, लेकिन दुल्हन का कहीं अता-पता नहीं। अमित की बेचैनी बढ़ती जा रही थी। तभी किसी ने बताया कि उनकी पत्नी प्लेटफॉर्म से बाहर किसी के साथ जाते देखी गई है। स्टेशन के बाहर लगे सीसीटीवी फुटेज चेक किए गए, और जो सामने आया, उसने अमित के पैरों तले से ज़मीन खिसका दी—दुल्हन अपने प्रेमी के साथ फरार हो चुकी थी!
“मेरी दुल्हनिया चली गई!”
ग़मगीन अमित प्लेटफॉर्म पर ही सिर पकड़कर बैठ गए, जैसे कोई बॉलीवुड फिल्म का क्लाइमेक्स चल रहा हो। उनकी धूमधाम वाली शादी का ये अजीबोगरीब अंत देखकर लोग भी चौंक गए। जिन रिश्तेदारों ने शादी में जमकर लड्डू खाए थे, वे अब तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं देने लगे—
“अमित ने इतना कुछ किया, लेकिन फिर भी लड़का फेल हो गया!”
“बेटा, प्यार में धोखा मिला है, अगली बार सतर्क रहना!”
“भैया, टिकट तो कट ही चुकी है, अकेले ही घूम आओ!”
हालांकि, इस घटना के बाद अमित के दोस्त और करीबी उन्हें अलग-अलग सलाह देने में जुट गए। कुछ ने कहा कि “अब तो अमित को भी किसी और की बारात से भाग जाना चाहिए!”, तो कुछ ने उन्हें सीधे “जाने भी दो यारों!” वाली फीलिंग अपनाने की सलाह दी।
“कहानी का मोरल?”
शादी सिर्फ प्यार का नहीं, भरोसे का भी रिश्ता होता है। सीतामढ़ी के अमित कुमार की कहानी उन तमाम दूल्हों के लिए चेतावनी है जो सोचते हैं कि पैसा खर्च करके सब ठीक कर सकते हैं। कभी-कभी दुल्हन की मंशा भी जान लेनी चाहिए—वरना शादी होगी, बारात भी निकलेगी, लेकिन अंत में कोई और ही “दुल्हनिया ले जाएगा!”