देश की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी बीजेपी के भीतर बड़ा बदलाव होने वाला है। भाजपा को जल्द मिलने वाला है नया राष्ट्रीय अध्यक्ष, और सूत्रों की मानें तो संघ ने उस नाम पर अंतिम मुहर लगा दी है।
लेकिन हैरानी की बात यह है कि इस पूरी प्रक्रिया के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह खेमे की चुप्पी ने राजनीतिक हलचल को और गहरा कर दिया है।
बंद दरवाज़ों के पीछे हुआ संघ का निर्णायक मंथन
RSS ने नागपुर से लेकर दिल्ली तक कई बैठकों में पार्टी के संगठनात्मक भविष्य पर मंथन किया। 2029 के रोडमैप, कैडर की पुनर्स्थापना और विचारधारा के संतुलन जैसे मुद्दों पर गहन चर्चा के बाद अब खबर है कि भाजपा अध्यक्ष पद के लिए एक नाम पर सहमति बन चुकी है।
संघ से जुड़े सूत्रों का कहना है:
“नाम तय हो चुका है। अब सिर्फ ऐलान बाकी है।”
अध्यक्ष पद की दौड़ में दो चेहरे सबसे आगे
1. वसुंधरा राजे सिंधिया
पूर्व मुख्यमंत्री, अनुभवी नेता, महिला शक्ति का प्रतिनिधित्व और भाजपा की शाही छवि को मजबूती देने वाली वरिष्ठ नेता।
2. संजय जोशी
संघ समर्पित, जमीनी संगठन से जुड़े, लंबे समय तक साइडलाइन रहे लेकिन अब फिर से चर्चा में। मोदी-शाह युग के विरोधाभास के प्रतीक।
सूत्रों का दावा है कि संघ ने इन्हीं दो नामों में से एक पर अपनी सहमति दी है, जिससे पार्टी में नया राजनीतिक संतुलन उभर सकता है।
मोदी खेमे की चुप्पी क्या संकेत दे रही है?
अब तक मोदी या अमित शाह की ओर से कोई बयान नहीं आया है। न संगठनात्मक मीटिंग्स में सक्रिय भागीदारी और न ही मीडिया को कोई संकेत।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह चुप्पी या तो आंतरिक असहमति का संकेत है, या फिर रणनीतिक स्वीकृति का संकेत, जिसमें संघ को निर्णय की छूट दी गई है।
क्या संघ बनाम सत्ता का नया अध्याय खुल रहा है?
यह मुकाबला सिर्फ अध्यक्ष के नाम का नहीं है —
यह इस बात की जंग है कि भाजपा चेहरा-प्रधान रहेगी या संगठन आधारित?
संघ चाहता है कि पार्टी दोबारा कैडर-आधारित मॉडल में लौटे, जबकि मोदी युग में पार्टी एक फेस-सेंटरिक हाईब्रिड मशीन में बदल चुकी है।
20 जुलाई से पहले हो सकता है ऐलान
सूत्रों के मुताबिक भाजपा नया अध्यक्ष संसद के मानसून सत्र से पहले घोषित कर सकती है, और यह भी तय माना जा रहा है कि नया अध्यक्ष संघ की सहमति से ही बनेगा।
सबसे बड़ा सवाल: कौन थामेगा भाजपा का सिंहासन?
क्या संजय जोशी की वापसी की पटकथा तैयार है?
या फिर वसुंधरा राजे को संगठन की कमान सौंपी जाएगी?
और उससे भी बड़ा सवाल…
क्या मोदी खेमे की यह चुप्पी किसी गहरे असंतोष या रणनीति की ओर इशारा है?
📌 यह सिर्फ नेतृत्व परिवर्तन नहीं, भाजपा के भविष्य की दिशा का फैसला है।